कॉपीराइट प्रश्न -40 (यह सवाल द हिंदू से बनाया गया है)
Q.40 हाल
ही में पर्यावरण मंत्री ने
वायु गुणवत्ता "सफार" की उन्नत प्रणाली का
उद्घाटन किया। इस
परियोजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनोँ पर
विचार करें:
1. यह तापमान, हवा की गति और हवा की दिशा जैसे सभी
मौसम मानकों की
निगरानी करेगा
2. यह प्रणाली बेंजीन,
मीथेन और टोलुइन के अस्तित्व की निगरानी भी करेगा
Which of the statements given above is/are correct ?
A) Only 1
B) Only 2
C) Both are correct
D) Both are incorrect
Ans. A
The system will also monitor the existence of Benzene, Toluene and
Xylene.
सफ़र-एयर की विशेषताएं
• सफ़र-एयर
वर्तमान में हवा के प्रदूषण स्तर की
सूचना उपलब्ध कराने वाली भारत में
पहली मोबाइल एप्प सेवा है.
• सफ़र-एयर
एप्प को पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मिट्रिओलॉजी (आईआईटीएम) के वैज्ञानिकों ने
विकसित किया.
• यह एप्लिकेशन नागरिकों को
उनके शहर के हवा के प्रदूषण स्तर की सूचना रीयलटाइम में उपलब्ध कराने में सक्षम होगी.
• यह एप्लिकेशन उपयोगकर्ता के
वर्तमान स्थान पर
एक रंग कोडित प्रणाली के
माध्यम से वर्तमान डेटा और
हवा की गुणवत्ता की पूर्वानुमान सूचना प्रदान करेगी. हरा रंग वायु प्रदूषण के न्यूतम स्तर का, पीला रंग सूक्ष्म प्रदूषण
और
लाल खतरनाक स्तर का सूचक है.
• एप्लिकेशन को
शुरू में गूगल के एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के स्मार्टफोन्स पर
और बाद में एप्पल के
आईओएस स्मार्टफोन्स पर
उपलब्ध होगा.
• उपयोगकर्ता एप्प की जानकारी ट्विटर,
फेसबुक और ईमेल के माध्यम से साझा भी कर सकते हैं.
भारत में हवा के प्रदूषण का
स्तर
भारत के मेट्रो शहरों में हवा के प्रदूषण का
स्तर विशेषत: दिल्ली में बहुत तेजी से बिगड़ रह
है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के
अनुसार भारत में
1.9 करोड़ लोग
वायु प्रदूषण के
कारण प्रति वर्ष मृत्यु के शिकार हो जाते हैं.
मई
2014 में डब्ल्यूएचओ द्वारा और
फरवरी 2014 में येल विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार नई दिल्ली में वायु प्रदूषण का
स्तर भारत और
दुनिया में सबसे अधिक है.
वर्ष 2010 के बाद से नई दिल्ली की
हवा में नवंबर 2014 और जनवरी 2015 के बीच 2.5 माइक्रोमीटर व्यास से कम आकार के पार्टिकुलेट मैटर्स सबसे ज्यादा थे.
पार्टिकुलेट मैटर्स क्या हैं?
पार्टिकुलेट मैटर्स में सल्फेट्स, नाइट्रेट,
अमोनिया, सोडियम क्लोराइड, कार्बन ब्लैक, खनिज धूल और जल शामिल है.
इन सभी को सबसे खतरनाक वायु प्रदूषक माना जाता है. वायु प्रदूषण से
सांस संबंधी बीमारियां होती हैं. इनमें अस्थमा
और
फेफड़े से संबंधी बीमारी भी
शामिल है. वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर का
कारक भी हो सकता है.
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 10 माइक्रोन या उससे कम व्यास के कण स्वास्थ्य को
ज्यादा नुकसान पहुँचाते हैं. यह कण फेफड़ों को
ज्यादा प्रभावित करते हैं.